Supreme Court Hearing: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से स्पष्ट शब्दों में पूछा कि इस मामले में इतनी जल्दबाजी की क्या वजह है। कोर्ट ने संकेत दिया कि फिलहाल इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं दिखती और नियमित प्रक्रिया के तहत ही सुनवाई होगी। चढ़ावा विवाद गहराया यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के कथित उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि दान की राशि के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी किसी सक्षम जांच एजेंसी या अदालत ने पुष्टि नहीं की है। याचिका में केवल आरोप लगाने तक बात सीमित नहीं रही। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं और पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अगुवाई में गठित विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए। इसके साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि जांच अदालत की निगरानी में हो और उसके लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए, ताकि जांच लंबी न खिंचे। अदालत ने रोका जब मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध हुआ तो याचिकाकर्ता की ओर से तत्काल सुनवाई की मांग रखी गई। उनका तर्क था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र सुनवाई और आवश्यक निर्देश दिए जाने चाहिए। लेकिन अदालत इस दलील से सहमत नहीं दिखी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की ऐसी क्या आवश्यकता है। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ऐसा कोई असाधारण कारण सामने नहीं आया, जिसके चलते नियमित प्रक्रिया से हटकर तुरंत सुनवाई की जाए। कोर्ट का निर्देश इसके बाद शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस याचिका पर फिलहाल तत्काल सुनवाई नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि मामला न्यायालय की छुट्टियां समाप्त होने के बाद नियमित सूची के अनुसार सुना जाएगा। यानी अब इस याचिका पर आगे की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई की मांग अस्वीकार की है। याचिका अपने स्थान पर बनी हुई है और अवकाश के बाद उस पर सुनवाई की जाएगी। उस दौरान अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए और याचिकाकर्ता की मांगों पर विचार किया जाना आवश्यक है या नहीं। रहस्य पर फैसला फिलहाल पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है। एक ओर याचिकाकर्ता निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को नियमित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ाएगा। अब सभी की नजर अदालत के दोबारा खुलने के बाद होने वाली सुनवाई पर रहेगी, जहां यह स्पष्ट होगा कि आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है। ये भी पढ़ें: चढ़ावे की रकम का बैंक में होता था बंटवारा? जांच में चौंकाने वाले संकेत